मित्रो, यह सच्चाई नहीं है। आप भगवान् के बड़े बेटे हैं। आप उनके बेटे हैं, जो बड़ा उदार, दयालु, कृपा का सागर तथा सर्वसम्पन्न है। भगवान् अपने लिए क्या चाहता है? क्या खाता है? वह केवल दूसरों के लिए जिन्दा रहता है, आपको यह सोचना चाहिए तथा अपना जीवनक्रम बदलने का प्रयास करना चाहिए। आप तो केवल लक्ष्मी का मंत्र सीखना चाहते हैं। आप कहते हैं कि गुरुजी यह क्या कह रहे हैं? मित्रो, आप चौरासी लाख योनियों का शरीर देखिये। आप अच्छे कर्म नहीं करेंगे, तो आपको गधे की योनि स्वीकार करनी पड़ेगी। आप पर ईंट लादी जाएँगी। वजन के मारे पीछे का पैर जख्मी हो जाएगा। पैर लड़खड़ाने लगेंगे। आप कहेंगे क आचार्य जी हम तो मन्नूलाल सेठ हैं। हम इस योनि में कैसे जाएँगे? आपने अच्छा कर्म नहीं किया, तो आपको घुसना ही होगा।
मित्रो! आपको अपनी मूर्खता पर विचार करना चाहिए। आप बेकार की समस्याओं- बेसिर की समस्याओं में उलझे हैं। आपका दिमाग इस उलझन में पड़ा रहता है। आपका जीवन बर्बाद हो रहा है और आप चुप बैठे रहते हैं। हम आपको धन्यवाद देने वाले थे, परन्तु अब नहीं देना चाहते। आपको अभी १२५ रुपये मिल रहे थे, पर आप ३५० रुपये की नौकरी चाहते हैं। यह बेकार की बातें हैं। आपको जब १२५ रुपये खर्च करना नहीं आता, तो ३५० रुपये कैसे खर्च करेंगे। बेकार की बातें बन्द कीजिए। अगर आप आचार्य जी का आशीर्वाद ले जाते तथा अपने जीवन को महान बना लेते, तो हम और आप दोनों धन्य हो जाते।
By-Pt. Shri Ram Sharma Acharya
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